Thursday, November 19, 2009

आईये जाने गॉल्फ़ को - ४

अब तक आपने गॉल्फ़ के मैदान के बारे में जाना, गेंद के बारे में जाना और गॉल्फ़ क्लब्स के बारे में भी जाना। अब जानते कुछ और महत्वपूर्ण बातों के बारे में।

एक खिलाड़ी को गॉल्फ़ खेलते समय कुछ और चीजों की जरुरत पड़ती है। उनमें पहला स्थान है पहनावे का।

एक पुरुष गॉल्फ़र को आधिकारिक रुप से कॉलर वाली टी-शर्ट या बॉटल नेक टी-शर्ट, हॉफ़ या फ़ुल बाँह वाली (स्लीवलेस नहीं), फ़ॉर्मल पैंट या ३/४th (कॉटन इत्यादी) (जींस नहीं) और गॉल्फ़ शूज़ पहनना होता है।

वहीं महिला गॉल्फ़र के लिये कॉलर वाली टी-शर्ट या बॉटल नेक टी-शर्ट, फ़ॉर्मल पैंट या स्कर्ट, गॉल्फ़ शूज़ मान्य है।

हाँ, दोनो के लिये टी-शर्ट, पैंट (या स्कर्ट) में खुसी हुई (IN) की होना चाहिये। इनके अलावा हैट, कैप या वाईसर और धूप के चश्में हो सकते हैं।

अक्सर खिलाड़ी एक हाथ में दस्ताना (golf glove) भी पहनता है| दांये हाथ का खिलाड़ी बांये हाथ में और बांये हाथ वाला खिलाड़ी दांये हाथ में। यह दस्ताना खिलाड़ी को क्लब पकड़ने से हाथ में होने वाले छालों से बचाता है।

टाईगर वुड्स

यह तो हुआ पहनावा। देखते हैं कि गॉल्फ़ किट में क्लब्स के अलावा और क्या-क्या हो सकता है।

पानी की बोतल, एक अच्छी सी छतरी (भई धूप या बारिश से बचने के लिये), कड़ी धूप से बचने के लिये सनस्क्रिन क्रिम, मच्छरों/घास के कीड़ों से बचने हेतु कोई क्रिम (अब कछुआ छाप अगरबत्ती ले कर फ़िरने से तो रहे), एक स्कोरकार्ड - अपना स्कोर दर्ज करने के लिये, एक अदद पेन/पेंसिल (अब स्कोर कैसे दर्ज करोगे), एक डायरी - उस गॉल्फ़कोर्स के बारे में कुछ जानकारी, जैसे बंकर, वृक्षों , पानी इत्यादी की स्थिति।

इनके अलावा कुछ अतिरिक्त गेंदें, अरे भई, अगर गेंद पानी के डबके में गई तो उसमें कुद के निकालोगे क्या?

दो और छोटी (परंतु महत्वपूर्ण) वस्तुएं, जो खिलाड़ी की जेब में होती हैं -
पिच रिपेयरर: आपके शॉट मारने से अगर फ़ेअरवे या ग्रीन का कुछ हिस्सा खराब होता है तो आपका फ़र्ज बनता है कि उसे थोड़ा सा ठीक कर दें, जिससे आपके पीछे आने वाले खिलाडियों को उससे असुविधा ना हो। पिच रिपेयर से आप घास/मिट्टी को थोड़ा दबा/उठा सकते हैं। एक छोटी (बहुत छोटी) खुरपी जैसा होता है, जो आसानी से जेब मे समाजाने जितना ही बड़ा होता है।

बॉल मार्कर: जब आपकी गेंद 'ग्रीन' पर पहुँच जाती है तो आप उसे उठा कर साफ़ कर फ़िर से वहीं रख सकते हैं। आप अपनी गेंद उठाने के पहले बॉल मार्कर रखते हैं जिससे आपकी गेंद वापस रखते समय ठीक उसी जगह रखी जा सके। यह एक सिक्के जैसा होता है।

पिच रिपेयर और मार्कर

एक ऑप्शनल वस्तु:
गॉल्फ़ ट्राली: गॉल्फ़ किट को इस ट्राली पर रख कर खींचते हुये ले जाया जा सकता है।

इन सबके अलावा जो एक बहुत ही महत्वपूर्ण व्यक्ति, जो कि हर खिलाड़ी के साथ होता है, वह है कैडी।

कैडी: आपने अक्सर देखा होगा कि गॉल्फ़ खेलते समय प्रत्येक खिलाड़ी के साथ-साथ एक आदमी चलता है जो कि उस खिलाड़ी की गॉल्फ़किट उठा कर चलता है। उसे ही कैडी कहते हैं। प्रत्येक शॉट के पहले वह किट में से खिलाड़ी को सही क्लब निकाल कर देता है, और शॉट के बाद क्लब को साफ़ कर के वापस किट में रखता है। यह कैडी न सिर्फ़ उसके खिलाड़ी की किट उठाता है, बल्कि उसे गॉल्फ़कोर्स के बारे में सलाह भी देता है (जब जरुरत हो)। अक्सर यह कैडी उसी गॉल्फ़कोर्स का ही कर्मचारी होता है। जिसे कोर्स के बारे में बहुत जानकारी होती है, जिसे वह उसके खिलाड़ी के साथ टुर्नामेंट के समय बाँटता है। स्तरिय टुर्नामेंट्स में खेल शुरु होने के बाद खिलाडी अपने कैडी के अलावा किसी और से बात नहीं कर सकता है। अधिकतर जाने माने खिलाड़ी हर जगह अपने तय कैडी को ही ले जाना पसंद करते हैं। जैसे नंबर एक खिलाड़ी टाईगर वुड्स के कैडी हैं स्टीव विलियम्स, जो कि हमेशा उनके साथ हर प्रतियोगिता में रहते हैं।

कैडी बनना भी आसान काम नहीं है। आपको गॉल्फ़ के बारे में बहुत जानकारी होना चाहिये। गॉल्फ़ कोर्स को 'पढते' आना चाहिये, हवा, तापमान इत्यादि बहुत सी बातों का ज्ञान होना चाहिये। और सही समय पर अपने खिलाड़ी को सही सलाह देते आना चाहिये।

साथ ही यह भी जान लें कि कैडी बनना दोयम दर्जे का काम नहीं है। इसमें भी काफ़ी कमाई होती है। हर प्रतियोगिता की फ़ीस के साथ ही साथ अगर उनका खिलाड़ी जितता है तो पुरुस्कार राशी का कुछेक प्रतिशत (५%-१०%) भी कैडी के खाते में जाता है। तो आप खुद अंदाजा लगा लीजिये कि स्टीव विलियम्स साल में कितना कमाते होंगे। इंटर्नेट की माने तो सन २००५ में स्टीव ने $697558 सिर्फ़ टाईगर का कैडी बनकर ही कमाया था। और २००८ में (शायद) यह आंकड़ा बढ कर $4900000 हो गया था।

टाईगर और स्टीव

शायद यही कारण हो कि कई प्रोफ़ेश्नल गॉल्फ़र्स, गॉल्फ़ छोड़ कर कैडी बनने का फ़ैसला लेते हैं और(यकिन करना मुश्किल है, परंतु) वे अपने गॉल्फ़ कैरियर से अधिक कमा लेते हैं।

इन सबके अलावा एक गोल्फ़ कोर्स में एक चीज और जो देखी जाती है वह है गॉल्फ़ कार्ट/बग्गी।
यह एक बैटरी से चलने वाली छोटी सी गाड़ी होती है जो खिलाडियों, उनकी किट और कैडी को उस कोर्स में एक जगह से दूसरी जगह पहुचाने के काम आती है।

गॉल्फ़ कार्ट


आज के लिए इतना ही। अगली बार हम हैण्डिकैप और गॉल्फ़ खिलाडियों के स्तर के बारे में जानेंगे, और यह कि एक अमेच्युअर और प्रोफ़ेश्नल खिलाड़ी में क्या फ़र्क होता है।

Saturday, October 31, 2009

आइये जाने गॉल्फ़ को - ३

पिछली बार आपने गॉल्फ़ बॉल के बारे में जाना, अब पढते हैं गॉल्फ़ क्लब के बारे में।

जिस तरह क्रिकेट में बैट से, टेनिस में रेकेट से बॉल को हिट किया (मारा) जाता है, उसी प्रकार गॉल्फ़ में जिस स्टिक से बॉल को हिट किया जाता है उसे साधारणत: 'क्लब' कहा जाता है। जहाँ बाकी खेलों में एक ही प्रकार के बैट, रेकेट इत्यादि होते हैं, वहीं गॉल्फ़ में कई प्रकार के 'क्लब्स' होते हैं जिनकी सहायता से यह खेल खेला जाता है। यह क्लब्स रखने के लिए एक बैग होता है, जिसे 'गॉल्फ़ किट' या 'गोल्फ़ बैग' कहा जाता है। गॉल्फ़ खेलते समय यह किट खिलाड़ी खुद या उनके सहायक उठाकर चलते हैं। इन सहायकों को 'कैडी' कहा जाता है। कैडी किट उठाकर चलने के अलावा भी काफ़ी काम का होता है। उसके बारे में बाद में जानेंगे। पहले यह जान लें कि गॉल्फ़ में कई प्रकार के क्लब्स क्यों होते हैं और उनकी क्या भूमिका होती है।

जैसा कि मैं पहले ही बता चुका हूँ कि गॉल्फ़ का मैदान काफ़ी विस्तृत होता है, और खिलाड़ी को उसकी बॉल एक जगह से शुरु करके एक होल तक पहुँचानी होती है। तो हर बार खिलाड़ी के लिये एक नई चुनौती होती है, क्योंकि उसका हर शॉट किसी अलग जगह ही जा कर गिरेगा। एक उदाहरण से समझते हैं। एक होल है ४५० यार्ड्स का। एक खिलाड़ी टी से शुरुआत करता है। उसने बॉल हिट की, उसकी बॉल होल की दिशा में कहीं भी गिर सकती है। मान लेते हैं कि टी से १८० यार्ड्स की दूरी पर गिरी। अब खिलाड़ी को उसका अगला शॉट इस तरह से खेलना पडेगा कि बॉल होल से और नजदीक पहुँचे। मगर अब यहाँ से होल की दूरी है २७० यार्ड्स। इसी प्रकार उसका तीसरा शॉट होल के और नजदीक होगा। कुल मिला कर यह कहा जाय कि एक गॉल्फ़र एक ही शॉट को दुबारा नहीं खेलता तो भी अतिश्योक्ति नहीं होगी। इसलिये एक ही 'क्लब' से अलग अलग दूरी के शॉट्स मारना, असंभव नहीं तो, आसान भी नहीं है। इसलिये, एक गॉल्फ़ किट में अलग अलग दूरी के शॉट्स मारने के लिये अलग अलग क्लब्स होते हैं।

एक क्लब के तीन हिस्से होते हैं:
ग्रिप (grip): जहाँ से क्लब को पकड़ा जाता है।
हेड (head): क्लब का वह सिरा जिससे बॉल को हिट किया जाता है।
शॉफ़्ट (shaft): ग्रिप और हेड को जोड़ने वाली लंबी छड़।

हर क्लब, दूसरे क्लब से अलग होता है, यानी कि शाफ़्ट की लंबाई और शाफ़्ट-हेड के कोण (angle) हर क्लब में अलग होते हैं। एक क्लब को उसकी श्रेणी और उसके नंबर से पहचाना जाता है। जैसे 3 wood, 4 wood, 5 wood या 2-iron, 3 iron ...9 iron इत्यादि। एक श्रेणी का क्लब उसी श्रेणी के कम नंबर वाले क्लब से लंबाई (shaft) में कम होगा पर कोण (shaft-head angle) ज्यादा होगा।

Shaft-Head Angle (शाफ़्ट-हेड कोण): यह बॉल की उँचाई और दूरी तय करता है। जितना ज्यादा कोण उतनी ज्यादा उँचाई परंतु कम दूरी, और कम कोण याने ज्यादा दूरी परंतु कम उँचाई।

नीचे दिया गया चित्र ३ मुख्य श्रेणियों को दर्शा रहा है।
वुड (wood): इन्हे 'फ़ेअरवे वुड्स' भी कहा जाता है। इनके द्वारा बॉल सर्वाधीक दूरी तक हिट की जा सकती है। यह बाकी क्लब्स से लंबे होते हैं। साधारणत: इनमें ३, ४, और ५ नंबर के वुड्स होते हैं। पहले यह लकड़ी के ही होते थे, इसलिये इन्हे वुड्स कहा जाता था। आजकल ये धातु के बनते है, परंतु वुडस नाम ही चलन में है हालाँकि इनके नाम में गॉल्फ़ के नंबर १ खिलाड़ी 'टाईगर वुड्स' का कोई योगदान नहीं है। :)

आयर्न (iron): यह नंबर 2 से नंबर 9 तक होते हैं। इनके अलावा इन्हीं में wedges (वेजेस) भी होते है pitching wedge, lob wedge और sand wedge.

पटर (putter): यह एकमात्र क्लब होता है जो कि बिना किसी कोण का होता है। इसका उपयोग सिर्फ़ green में ही किया जा सकता है, बॉल को होल में डालने के लिये।

इनके अलावा आजकल drivers भी काफ़ी चलन में हैं। यह सबसे लंबे होते हैं, और इनका हेड भी काफ़ी बड़ा होता है। लंबे टी शॉट्स खेलने के लिये इनका इस्तेमाल होता है।
इस तरह से देखें तो एक गॉल्फ़र के किट में एक putter, कुछ irons, wedges, woods और एक driver होते हैं।

देखें चित्र: Driver और Woods के कोण और प्रकार:

देखें चित्र: Putter, Irons और Wedges के कोण और प्रकार:

इन मानक (standard) क्लब्स के अलावा आजकल नई तकनीक से बने हुये hybrid क्लब्स भी आ रहे हैं। जो कि iron+wood को मिलाकर बनते हैं।

Wedges: जब बॉल green के काफ़ी पास आ जाती है तो pitching wedge (PW) या lob wedge (LW) का इस्तेमाल किया जाता है। जबकि जब बॉल किसी sand bunker में चली जाती है तो sand wedge (SW) का इस्तेमाल किया जाता है।

वैसे तो गॉल्फ़ में इस बात का कोई नियम नहीं है कि कौन-सा शॉट कौन से क्लब से खेला जायेगा, और खिलाडी अपना शॉट खेलने के लिये अपनी किट से कोई भी क्लब चुनने के लिये स्वतंत्र होता है।
किस तरह के क्लब से कितनी दूरी का शॉट लगेगा इसका कोई मानक नहीं है। यह हर खिलाड़ी के तरीके पर निर्धारित होता है कि वह कितनी दूरी और कितनी सटीकता से शॉट मार सकता है। इसलिये खिलाडी अपने हिसाब से अपने किट में क्लब्स रखता है।

हाँ, जहाँ तक नियम की बात है, आधिकारिक रुप से एक टुर्नामेंट में एक खिलाड़ी के किट में अधिकतम १४ क्लब्स ही हो सकते हैं।

आज के लिये इतना ही।

चित्र साभार: www.visualdictionaryonline.com

Monday, August 17, 2009

कहाँ है हमारा स्वाभिमान?

हमारे देश के पूर्व राष्ट्रपति को हमारे ही देश में एक विदेशी एयरलाईंस के कर्मचारी द्वारा हवाईअड्डे पर तलाशी के नाम पर रोका जाता है। और इस गंभीर बात की अखबारों में तक खबर नहीं बनती।


जबकि हमारे एक "अभिनेता" को एक दूसरे देश में उसी देश के अधिकारियों द्वारा इम्मीग्रेशन के लिये रोका जाता है, और अपने देश का मीडिया सुबह शाम उसी खबर को बढा-चढा कर परोस रहा है।


इसे विडंबना कहें? या यही है हमारा (सोया हुआ) स्वाभिमान?

Sunday, August 02, 2009

बच गये...

अभी अभी आया है फ़ैसला . . .और शायद यही शब्द आये होंगे दिल्ली के दोनो छोरों के घरवालों के मन में ... !!

आपके मन में क्या आया??

Monday, July 20, 2009

आईये जाने गॉल्फ़ को-२

पिछली कड़ी में आपने गॉल्फ़ के खेल और मैदान के बारे में जाना। इस बार हम इसमें इस्तेमाल होने वाले साधनों पर थोड़ी नज़र डालते हैं।

गॉल्फ़ खेलने के लिये एक अदद मैदान के अलावा और बहुत कुछ चाहिये होता है, इनमें जो सबसे महत्वपूर्ण वस्तु है वह है - गेंद

काफ़ी सालों (पढें शतकों) पहले यह चमड़े की बनाई जाती थी, और इसमें एक पक्षी के पंख भरे जाते थे। फ़िर वहाँ से सफ़र बढाते हुये, यह लकड़ी और रबर, स्पंज से होते होते आज की आधुनिक बॉल तक पहुँची है। अब तो यह विभिन्न प्रकार के सिन्थेटीक के मिश्रण से बनाई जाती है।

आजकल यह दो, तीन या चार परतों में बनाई जाती है। इन्हें क्रमश: two-piece, three-piece और four-piece बॉल कहा जाता है।

सामान्यत: एक कड़क खोल, जिसमें तरल या कोई ठोस पदार्थ भरा होता है, को रबर के डोरियों से कस कर लपेटा जाता है और फ़िर अंत में इसपर एक (सिंथेटिक) कवर चढा दिया गया है, इस प्रकार की गेंद इस्तेमाल में लाई जाती है।

गॉल्फ़ के नियमों के मुताबिक इस गेंद का वजन अधिकतम ४५.९३ ग्राम होता है, और इसका व्यास कम से कम ४२.६७ मिमी होता है। यह टेबल टेनिस की बॉल से थोड़ी बड़ी होती है मगर ठोस होती है। इसकी जो खासियत है वह है इसपर पडे हुए छोटे-छोटे छेद, जिन्हें डिम्पल कहा जाता है। (देखें चित्र)।

गॉल्फ़ की गेंद पर जो छिद्र से बने होते है वह वैज्ञानिक कारणो से होते हैं और इन्हीं की वजह से गेंद काफ़ी ज्यादा दूरी तय कर पाती है - करीब २५० से ३५० मीटर तक।

इंटरनेट के एक स्त्रोत की मानें तो किसी खिलाड़ी द्वारा मारे गए सबसे लंबे शॉट का रिकार्ड ४५८ यार्ड्स (४१८.७८ मी) का है, जो कि अमेरिका के जैक हैम के नाम है।

संयोग की बात है कि यह रिकार्ड सोलह साल पहले, आज ही के दिन यानि २० जुलाई १९९३ ही बना था।

चित्र: गॉल्फ़ बॉल
चित्र साभार: www.visualdictionaryonline.com

चित्र में जो बॉल की नीचे एक लम्बी सी वस्तु दिखाई दे रही है (जिसपर बॉल रखी हुई है) उसे Tee/टी कहते हैं।

ध्यान दें कि जिस जगह से खेल शुरु करते हैं उसे क्षेत्र को भी tee कहते हैं और पहला शॉट मारने के लिये बॉल जिस चीज पर रखी जाती है उसे भी tee ही कहते हैं। और शायद इसीलिये हर होल के पहले शॉट को tee-shot कहा जाता है।

यह tee लकड़ी अथवा प्लास्टिक की होती है, और इसका उपयोग सिर्फ़ किसी "होल" को शुरु करने के वक्त पहले शॉट के लिये ही किया जा सकता है।

इस tee को जमीन में गाड़ दिया जाता है और इसपर बॉल रखी जाती है। इस कारण बॉल जमीन से थोड़ी उपर हो जाती है तथा लंबा शॉट मारने के लिये आसानी हो जाती है।

आगे के पोस्ट में हम गोल्फ़ क्लब (जिससे बॉल को hit किया जाता है) के बारे में जानेंगे।

Thursday, July 09, 2009

आईये जाने गॉल्फ़ को-१

गॉल्फ़ - हॉकी जैसी स्टिक से एक बाल को मारते चलो और मैदान में एक छेद में डाल दो। बस। बुढ्ढों का खेल है जो फ़िट रहने के लिये खेलते हैं। अमीर लोगों के चोंचले हैं..और ना क्या क्या।

ज्यादातर लोगों की गॉल्फ़ के बारे में यही सोच रहती होगी। देखने में तो काफ़ी सरल लगता है। मगर यकीन मानिये इतना भी सरल नहीं है। अभी हम इसके उपर जो टैग (अमीरों का खेल, बुढ्ढों का खेल इत्यादि) चिपका है उसे दरकिनार करते हुये समझते हैं कि आखिरकार यह खेल है क्या।

इस खेल का इतिहास वगैरह जानने के लिये तो कृपया गुगल देव की शरण में ही जायें। यहाँ हम सिर्फ़ इस खेल को सीधे साधे शब्दों में जानेंगे।

गॉल्फ़, एक बहुत बड़े परीसर में खेला जाता है। यह एक ऐसा खेल है जिसमें इसके परिसर का कोई मानक माप नहीं होता। इस परीसर को "कोर्स" कहा जाता है। एक गॉल्फ़ कोर्स को वहाँ मौजुद "होल्स" (कप्स/छेदों) की संख्या से मापा जाता है। ज्यादातर कोर्स नौ (९) या अठारह (१८) होल्स के होते हैं। इसका मतलब एक खिलाड़ी को उस गॉल्फ़ कोर्स में नौ/अठारह अलग अलग क्षेत्र मिलेंगे खेलने के लिए। जैसे किसी रेस में एक start और finish पाईंट होता है, वैसे ही एक "होल/कप" को खेलने के लिये भी एक start और एक finish पाईंट होते हैं। जो start पाईंट होता है उसे टी/Tee कहते हैं। और finish होल/कप पर होता है। इसका मतलब अगर कोई गॉल्फ़ कोर्स १८ होल्स का है तो वहाँ (कम से कम) अठारह Tee और ठीक अठारह Holes होंगे।

कम से कम इसलिये कहा है कि अठारह से अधिक भी tee हो सकती है। याने एक ही hole के लिये अलग अलग starting points भी हो सकते हैं, जो कि अलग अलग श्रेणी के खिलाडियों के लिये हो सकते हैं। श्रेणियाँ जैसे कि महिला खिलाड़ी, सीनियर (वेटरन) खिलाड़ी और प्रोफ़ेश्नल खिलाडी। बिलकुल मेराथन दौड़ की तरह। जहाँ बच्चों, वरिष्ठ, महिलाओं और पुरुषों के लिये अलग अलग start points होते हैं, पर finish point एक ही होता है।

गॉल्फ़ का एक खेल (ज्यादातर) १८ होल्स का ही होता है। जिसमें खिलाडी पहले tee से शुरु करते हैं, कम से कम शाट्स मार कर पहले होल में बाल डालने का प्रयास करते हैं, फ़िर दूसरे tee से शुरु कर के दूसरे होल में बाल पहुँचाते है, और इस तरह अठारह होल्स पुरे करते हैं। एक खेल के अंत में जिस खिलाड़ी ने सबसे कम शाट्स मारे होते हैं वह विजेता घोषित किया जाता है।

जैसे क्रिकेट में inning होती है वैसे ही गॉल्फ़ में "होल" होते हैं। फ़र्क यह होता है कि एक खिलाड़ी को एक-दो नहीं पुरे १८ होल्स खेलने होते हैं। और हर होल अपने आप में एक बड़ा सा मैदान होता है। हर होल में:
- tee और hole दोनो के बीच की दूरी अलग होती है
- tee से hole तक का रास्ता अलग होता है
- tee से hole के रास्ते में अड़चने अलग होती हैं
किसी का भी कोई मानक नहीं होता, यह उस कोर्स की रचना करने वाले पर या/और वहाँ मौजुद प्राकृतिक बाधाओं (वृक्ष, झाडियां इत्यादि) पर निर्भर होता है। और यही सब मिलकर गॉल्फ़ को एक कठीन खेल की श्रेणी में रखते हैं।

Tee का क्षेत्रफ़ल काफ़ी छोटा होता है, बिल्कुल समतल, और एक समान बारीक कटी हुई घास होती है। यहाँ दो मार्कर/चिन्ह होते हैं जिसके बीच में गेंद रख कर खेल आरंभ करना होता है। इस जगह के बाद गेंद को हाथ से छुना नियम विरुद्ध होता है।

Hole, यानि कि जहाँ गेंद डालनी होती है, के आस पास के क्षेत्र को ग्रीन/green कहते हैं। इस जगह की घास बिल्कुल महीन कटी होती है। बिलकुल एक समान। यह क्षेत्र समतल हो जरुरी नहीं। अधिकतर तो यह समतल नहीं होता कहीं एक-दो या किसी भी तरफ़ ढलान सा लिये हुये होता है।

Tee और hole के बीच जो सामान्य क्षेत्र होता है उसे फ़ेअरवे/fairway कहते हैं। यहाँ घास एक समान ही कटी होती है पर green से बड़ी होती है, और fairway में कुछ अड़चने हो सकती है। Fairway के आसपास उसकी सीमा दर्शाने के लिये झाड़ियाँ या पेड़ लगे हो सकते है। परंतु देखा जाये तो एक होल की कोई तय सीमा नहीं होती। मगर सही खेलने के लिये गेंद को tee से fairway होते हुये green और अंत में hole तक ले जाना होता है।

Fairway से बाहर के क्षेत्र को रफ़/rough कहते हैं।

अड़चनें: खेल को और रोचक और कठीन बनाने के लिये green के आस पास, और fairway में अड़चने होती/हो सकती हैं। यह झाड़ी, पेड़ के अलावा रेत से भरा गढ्ढा (बंकर) भी हो सकता है और पानी से भरी झील या पोखर भी हो सकता है। एक खिलाड़ी को इन सबसे बचते हुये अपनी गेंद hole तक पहुँचानी होती है।

अधिकतर गॉल्फ़ कोर्सेस में एक hole के नजदीक ही दूसरे होल का tee होता है ताकि दूसरे होल का खेल शुरु करने के लिये ज्यादा चलना ना पड़े। वैसे पुरे परीसर में एक पतला सा पक्का रास्ता भी बना होता है जहाँ बैटरी से चलने वाली कार, जिसे golf cart कहते है, चलती है। पर यह जरुरी नहीं कि हर गॉल्फ़ कोर्स में यह हो ही।

वैसे तो इस खेल के क्षेत्र/परीसर का कोई मानक माप या रचना नहीं होती है, मगर एक चीज होती है जो मानक होती है।

वह होता है हर hole में गेंद पहुँचाने के लिये लगने वाले शाट्स/स्ट्रोक की संख्या। हर hole को एक शब्द से मापा जाता है - Par/पार। एक tee से उसके होल में गेंद पहुँचाने में लगने वाले मानक शाट्स की संख्या को पार/par कहते हैं। यह निश्चित किया जाता है tee/green के बीच की दूरी को, उसकी अड़चनों को ध्यान में रखकर। यानि की अगर किसी एक होल का पार ४ है तो इसका मतलब एक औसत खिलाड़ी को tee से शुरु करके सिर्फ़ ४ शाट्स में गेंद को hole में डाल देना चाहिये। और इसी तरह से इस खेल में स्कोर रखा जाता है। 'पार' की तुलना में खिलाड़ी का स्कोर मापा जाता है। किसी होल का 'पार' कुछ भी हो सकता है - मगर एक बार तय होने के बाद सामान्यत: 'पार' बदलता नहीं है जब तक की कोर्स में ही कुछ बदलाव ना किया जाय।

इसे इस तरह से समझिये, एक गॉल्फ़ कोर्स में १८ होल्स हैं। हर hole के पार को जोड़ लें। फ़र्ज करें कि वह संख्या ७० आई, तो यह उस कोर्स का मानक हो गया। अब खिलाडियों को कम से कम ७० शाट्स में सारे holes पुरे करने चाहिये। स्कोर रखा जाता है पार से ज्यादा (+) या कम (-) । याने कि अगर किसी का अंतिम स्कोर +५ है तो इसका मतलब उसने ७५ शाट्स लगाये। अगर स्कोर -१० है तो उस खिलाड़ी ने ६० शाट्स में ही सारे holes पुरे कर लिये। जिसका स्कोर सबसे कम होता है वह खिलाड़ी जीतता है।

यह तो हुआ गॉल्फ़ कोर्स का विवरण। आगे ड्राईविंग रेंज और इसमें लगने वाली वस्तुओं (गेंद, स्टिक इत्यादि) की जानकारी लेंगे।

अगर ये विवरण पढकर आपको एक गॉल्फ़ कोर्स देखने का मन हो आया है तो इस लिंक (http://www.bantrygolf.com/courseTour/index.cfm) को देखें। मैने यह कड़ी इंटरनेट से ढुंढी है, इसमे वह सब है जो मैं बताना चाहता था।

१. किसी जानकार को कोई त्रुटी नजर आई हो तो बतायें। दुरुस्त कर ली जायेगी। हम तो अभी अमेच्योर के "अ" भी नहीं हैं।

आगे:

मैं अब कर लुँ क्या?

"डाक'साब, नमस्ते"

नमस्ते, नमस्ते। आईये, बैठिये।

"डाक'साब, लगता है आपने मुझे पहचाना नहीं"

ह्म्म्म...याद तो नहीं आ रहा। आप पहले भी क्लीनिक में आ चुके हैं क्या?

"अरे डाक'साब, मैं पिछले साल आया था ना आपके पास, इलाज के लिये"

अच्छा, क्या हुआ था?

"मुझे हल्का सा बुखार नहीं था? जिसका इलाज आपने किया था"

अच्छा, बिल्कुल भी याद नहीं आ रहा। खैर बताईये, अब कैसे आना हुआ? फ़िर कोई तकलीफ़ है क्या?

"नहीं नहीं डाक'साब, अब तकलीफ़ तो बिलकुल नहीं है।"

फ़िर?

"आपने तब स्नान करने को मना किया था, बस यही पुछना था कि मै अब कर लुँ क्या??"

.........!!!